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Sunday, September 19, 2021

काश ओ दिन फिर आ जाते |

 काश ओ दिन फिर आ जाते

 काश ओ दिन फिर आ जाते |
  काश ओ दिन फिर आ जाते |
  काश हम फिर वही पहले जैसे हो जाते,
  काश ओ होंठों कि हंसी फिर लौट आती |
   काश उन दोस्तो के साथ मस्ती फिर हो जाती ,
    काश ओ दिन फिर आ जाते |
    काश ओ दिन फिर आ जाते |

                   खुद को यूं हर चीज से रोके बैठे हैं |
                    काश ये रोकने की नौबत ही नहीं आती |
                    काश ओ दिन फिर आ जाते |
                     काश ओ दिन फिर आ जाते |
       
          काश यूं कोई बोल न जाता
           काश कोई अपना समझते |
           काश ओ हंसी ढिढोली फिर हो जाती ,
            काश ओ बचपन की खेल फिर आ जाते हैं |
             काश ओ बचपन के दोस्त फिर आ जाते हैं |
               काश ओ दिन फिर आ जाते |
                 काश ओ दिन फिर आ जाते |

 काश हमारी प्यार भरी सरारते फिर आ जाते,
 काश हमारी हरकते किसी को नौटंकी न लगता,
 काश ओ दिन फिर आ जाते|
काश ओ दिन फिर आ जाते|

                          By : Pooja Rauniyar


#poetry
#rauniyar556
#novainstituteofnursingandparamedicalscience
#lucknow
#up
#india


  

Monday, June 21, 2021

अंतराष्ट्रीय योग दिवस

                 अंतराष्ट्रीय योग दिवस






जैसे कि आप सभी जानते हैं कि 21 जून को पूरे विश्व में योग दिवस मनाया जाता है । वैसे तो हमारे देश में योग की शुरुआत कई हजार साल पहले ही हो चुका था । पहली बार योग को ऋग्वेद में दर्शाया गया था।

योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के यूज (yuj) शब्द से हुआ जिसका अर्थ जुड़ना (to unite or to join or to yoke) होता है। योग करने से हमारा शरीर स्वस्थ और रोगों से मुक्त हो जाता है । योग से आत्मा का परमात्मा से मिलन होता है । योग  हमारे जीवन में सकारात्मक शक्ति का प्रवाह होता है।

नए पीढ़ी में योग दिवस का आरंभ_____


योग दिवस की पहल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में मोदी जी ने अपने भाषण में कहा था कि____

योग भारत का  प्राचीन परंपरा का अमूल्य उपहार है । यह दिमाग और शरीर के एकता का प्रतीक है।  यह मनुष्य जीवन में संयम , सामंजस्य  और विचार की पूर्ति करता हैं । तो  आइए हम सभी एक साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पहल करते हैं।

जिसके बाद 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया । 21 जून को साल का सबसे बड़ा दिन होता है और योग दीर्घ जीवन प्रदान करता है यही कारण है कि योग दिवस 21 जून को मनाया गया।

योग जो सभी को करना चाहिए______

लोम विलोम प्राणायाम

इस प्राणायाम में एक नाक से सास को लिया जाता है फिर दूसरे नाक से उसे छोड़ दिया जाता है। इसे कम से कम 5 मिनट तक करना चाहिए।

अनुलोम विलोम के लाभ



अनुलोम विलोम करने से शारीरिक और मस्तिष्क रोगों से निजात मिलता है।

यह तनाव , घबराहट को दूर करता है और एकाग्रता बनाए रखता है।

पूरे शरीर में शुद्ध ऑक्सीजन की आपूर्ति करता है।

दिमाग , फेफड़े और हृदय को शक्तिशाली बनाता है।

एहतियात

शुरुआत में ज्यादा  समय तक नहीं करना चाहिए। रात को ज्यादा वक्त तक नहीं रुके रहना चाहिए। धीरे-धीरे समय को बढ़ाना चाहिए।

शितकारी प्राणायाम





यह तन और मन को शीतल बनाता है।

शीतकारी प्राणायाम शरीर की मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है।

 यह प्राणायाम मस्तिष्क के उन केंद्रों को प्रभावित करता है जो शारीरिक तापमान को केंद्रित करते हैं।

एहतियात

जिस क सर्दी खांसी अस्थमा हो वह इस प्राणायाम को करने से बचें।

सूर्य नमस्कार





सूर्य नमस्कार करने से हमारे शरीर में सकारात्मक शक्ति का प्रभाव होता है।

हमारे शरीर को शुद्ध और स्वस्थ बनाता है।

हमारे शरीर के सभी अंग स्वस्थ रहते हैं।

दिमाग को शांत और सक्रिय बनाता है।






#internatinalyogaday

#yogaandexercise

#novainstituteofnursingandparamedicalscience


#mrj #india

#mywayandmypassion



Thursday, May 27, 2021

क्रोध का मूल्य

क्रोध :- क्रोध या गुस्सा होना मनुष्य का एक प्राकृतिक स्वभाव हैं | क्रोध आने पर हृदय गति और रक्तचाप बढ़ जाता है|यह भय(डर), बेचैनी और तनाव से उपजता है। क्रोध मानव के लिए हानिकारक है। क्रोध कायरता का चिह्न है।  जिनमे परिस्थियों को झेलने का साहस नहीं होता उनको बहुत जल्दी क्रोध आता हैं | क्रोध जैसी नकारात्मक गतिविधी हमारे चरित्र और स्वास्थ पर बहुत हानिकारक प्रभाव डालती हैं| 

नाट्य शास्त्र में क्रोध को एक ‘रस’ या नैसर्गिक भाव कहा गया है। American Physiological Association ने ‘गुस्से को विपरीत परिस्थितियों के प्रति एक सहज अभिव्यक्ति कहा गया है।  इस उग्र प्रदर्शन वाले भाव से हम अपने ऊपर लगे आरोपों से अपनी रक्षा करते हैं। लिहाजा अपनी अस्तित्व रक्षा के लिए क्रोध भी जरूरी होता हैं | 
क्रोध का ध्येय किसी व्यक्ति विशेष या समाज से प्रेम की अपेक्षा करना भी होता है।

क्रोध से ज्यादातर हानि ही होती है परन्तु कभी-कभी हम गुस्से में अच्छा काम कर जाते है जैसे- गुस्से में अपने किसी काम को लेना कर लेना, जिससे हम प्यार करते है उनके ऊपर भी गुस्सा होते हैं और हमारे गुस्से को प्यार समझते हुए  बात को अच्छी तरह समझ जाते है | गुस्सा एक हद तक ही ठीक होता है | गुस्से में लिया गया फैसला हमेशा  हानिकारक  ही होता है, जब हमारा गुस्सा शांत होता है तो हमें दुःख और पछतावा होता है | 

आईये मै आपको अपनी एक हाल की ही एक घटना बताती हूँ , अभी कुछ दिन पहले अपने एक फ्रेंड से बात कर रही थीं | अचानक से मुझे उसकी बातो पर क्रोध आने लगी और हुआ यूं की गुस्से में सीढ़ियों से निचे उतरते वक़्त मेरे हाथ से फ़ोन छूटकर गिर गया और टूट गया | फ़ोन से जितनी  काम होती थी वो सब रूक गयी | बाद में अपने गुस्से पर  दुखी और पछतावा हुआ | 



जब आपके काम का श्रेय कोई और ले लेता है अथवा आपके काम पर प्रश्न उठाता है तो क्रोध के लक्षण उभरने लगते हैं। पर इससे पहले कि क्रोध हम पर हावी हो जाए हमें इसका प्रबंध करना जरूरी हो जाता है। हमें क्रोध के मूल कारण को जानने और समझने की जरूरत है| 
गुस्सा एक ऐसी अवस्था है जिसमें विचार तो आतें हैं लेकिन भाव अपनी प्रधानता पर होते हैं और सामने वाला कौन है? हमारा उससे क्या सबंध है? हमें उससे कैसा व्यवहार करना चाहिए ? आदि विचार लुप्त हो जाते हैं!

वास्तविकता यह है कि जब हमें गुस्सा आता है तो हम ज्यादा दूर तक नहीं सोच पाते बल्कि उससे होने वाले परिणाम के बारे में भी नहीं सोच पाते । बस दिमाग में रहता है तो वो है गुस्सा, गुस्सा, और गुस्सा। आपका दिमाग तभी संतुलित होकर सोच सकता है जब आप आपके अन्दर किसी भाव की अधिकता न हो । आपने देखा होगा कि जब हम बहुत खुश रहते हैं तब भी हम सही से नहीं सोच पाते । जब कोई भाव हमारे ऊपर पूरी तरह से हावी होता है तो सबसे ज्यादा हमारी "सोचने की क्षमता"(Ability of thinking) प्रभावित होती है ।

क्रोध का मूल्य हमेशा  बड़ा होता है :

गुस्से पर करें काबू 
- गुस्से पर नियंत्रण रखने के लिए बेहतर है कि आप सकारात्मक और क्रिएटिव काम करें
- कुछ भी ऐसा करें जिससे आपका ध्यान कुछ देर के लिए बंट जाएं
- मजाक तनाव दूर करने का सबसे बेहतर तरीका है। 
- समय पर खाना खाने से, कसरत करने से और पर्याप्त आराम करने से गुस्सा कम आता है
- योगा, मेडिटेशन और कांगनेटिव तकनीक भी तनाव और गुस्से को दूर करने में कारगर है

Sunday, May 23, 2021

childhood days

                  childhood days


Hello friends,


I am Pooja Rauniyar , welcome everyone on my blog prauniyarowpassion.blogspot.come by looking at the title of the blog, you must have understood what we are going to tell you about today. Today I went cycling out of my house. I often go out of the house cycling.There is a big Market behind my house. Nowadays the lock down is going on, so the entire market is staying empty. Because of the market being empty, all of us children go there and play.When my mind does not do anything, I want to ride a cycle that freshens my mind. Today I went for cycling and drove a little bit and saw some kids playing. And I stop and look at those children. All the children were next door to my house. The game that the children were playing is called Langri leg.



This game is played with one leg up. One leg is sprung from one section to another. In this game the breath is held back. When the breath stops, it is restarted from there.. During playing this the player should have to say Jumping, jumping, jumping, jumping, with holding a leg and holding breath




We also used to play this game when we were young. This game attracted me because it was a little different from the games of our time. The structure of the game in the game was different.It was just like Jalebi but it was in square shape.Then that child also taught me how to play. Then I also played with them.I started playing the wrong way while playing, then she told me the right way. I am very happy to play that game and I really enjoy that moment. After a round without reaching the breath, you get a home when you bring it to the outside where you can relax a little while playing. It was like a reward for the player. These are the games of childhood that give so much joy.You too must have remembered your childhood game by reading this blog.Hope you guys enjoyed reading this blog. Thank you for reading this blog. Comment how was it Whether your childhood memories are fresh.



#childhooshame

#mywayandmypassion

#novacollege



Tuesday, May 18, 2021

Our Dreams Tell Us Something

 



When we have dreams after sleeping, those dreams have some meaning in our life.                                          These dreams tell us the present condition and give us time to improve the future.

You must be feeling a little strange how dreams tell us about our self-

Let us tell you about your dreams and realty

In the dream, I feel like you must have experienced that: we have a very scary thing ,We are running and we are rushing ahead but it seems that we are not able to run. Such dreams show lack of confidence and fear in our faith. This means we need to increase our confidence and eliminate fear.

Sometimes I had such a dream that the same scary thing is running, but we start flying in the air while running , These dreams tell us that if you are thinking too much about something, it means that we do not over think.

There are so many dreams that we have to understand and we need to improve ourselves.

hindi translate:-


ब हम सोने के बाद सपने देखते हैं, तो उन सपनों का हमारे जीवन में कुछ अर्थ होता है। ये सपने हमें वर्तमान स्थिति बताते हैं और हमें भविष्य को बेहतर बनाने का समय देते हैं।


आपको थोड़ा अजीब लग रहा होगा कि कैसे सपने हमें हमारे बारे में बताते हैं-


आइए हम आपको बताते हैं आपके सपनों और हकीकत के बारे में


सपने में मुझे ऐसा लगता है कि आपने अनुभव किया होगा कि: हमारे पास बहुत डरावनी चीज है, हम दौड़ रहे हैं और हम आगे बढ़ रहे हैं लेकिन ऐसा लगता है कि हम दौड़ नहीं पा रहे हैं। ऐसे सपने हमारे विश्वास में आत्मविश्वास की कमी और भय को दर्शाते हैं। इसका मतलब है कि हमें अपना आत्मविश्वास बढ़ाने और डर को खत्म करने की जरूरत है।


कभी-कभी मुझे ऐसा सपना आता था कि वही डरावनी चीज चल रही हो, लेकिन हम दौड़ते-भागते हवा में उड़ने लगते हैं, ये सपने हमें बताते हैं कि अगर आप किसी चीज के बारे में बहुत ज्यादा सोच रहे हैं, तो इसका मतलब है कि हम ज्यादा नहीं सोचते।


बहुत सारे सपने हैं जिन्हें हमें समझना है और हमें खुद को बेहतर बनाने की जरूरत है।

Sunday, May 16, 2021

कोरोना पर आस्था या अंधविश्वास ?

   कोरोना पर आस्था या अंधविश्वास ?

हेल्लो दोस्तों


मैं पूजा रौनियार , आज आपको गांवो में corona viruses पर लोगो के अजीबो गरीब उपायों को बताऊंगी। जैसे की आप सभी जानते हैं कि गांवो में तरह तरह के लोग उपाय ढूंढ रहे है।

वैसे तो काढ़ा पीना लोगों का घर में रहना योग आसन करना ये सब तो अच्छी चीजें हैं।ये सारे उपाय करने से लोगो को रोगों से लड़ने में बहुत सहायता मिलेगा। पर आजकल गांवो में एक नया ही तरीका अपनाया जा रहा हैं। पता नहीं ये उनकी आस्था है या अंधविश्वास कौन जाने। मेरे हिसाब से तो ये लोगो का भ्रम है ।तो आप लोग सोच रहे होंगे कि किस भ्रम की बात हम यहां कर रहे हैं।

तो चलिए बताते है ,आजकल गांवो में लोग corona ko भगाने के लिए तरह तरह तरह के यज्ञ, पुजा पाठ, और सुबह शाम जल चढ़ा रहे हैं। गांव की सारी औरतें एक साथ किसी एक जगह जल चढ़ा रही हैं। ऐसा कोई घर नहीं जहा की औरतें न जाए । हर घर से एक औरत जल चढ़ाने ( छाक चढ़ाना) जाती हैं। चलिए ठीक है हर इंसान की सोच अलग अलग होता है। हसीं तो इस बात पर आता है कि लोग corona viruse को भगाने के लिए ये सब उपाय अपना रहे हैं और जो सच में corona को भगा सकता हैं ओ नियम लोग समझने की कोशिश तक नहीं कर रहे है । लोग जब भी जल चढ़ाने जाते है किसी के मुंह पर मास्क 😷😷 नहीं होते बस ऐसे एक दो लोग ही होंगे जिन्होंने मास्क लगाया हों जो लगाए भी है ओ बस मुंह ढके हैं जबकि मास्क को पूरा नाक तक ढक के लगाने चाहिए। आखिर ये क्या है विश्वास या अंधविश्वास। लोगों को इतने दिनो से समझाया जा रहा हैं आख़िर corona के नियमों को पालन करने वाले तरीके इनको क्यों नहीं समझ आया। ये नहीं हैं कि मेरे वहा से कोई नहीं जाता हमारी जो दादी है उन्हें कितना भी बता दो इससे कुछ नहीं होता लेकिन हमारी बातों पर विश्वास नहीं करेंगी उन्हें तो जाना ही है।



कुछ दिन corona को भगाने वाला छाक (जल) चढ़ाने के बाद लोग कढ़ाई चढ़ाते हैं। कढ़ाई चढ़ता है उसमें पूरी और आटे की हलवा बनाय जाता है।और सारे चीजों को भगवान का नाम लेकर चढ़ा देते हैं लोग। 


#coronaviruse

#covid19

#novacollege

#prauniyarownpassion.blogspot.com

 

Monday, May 3, 2021

my lockdown experience(2020)

हेल्लो दोस्तों

 मैं पूजा रौनियार आज आपलोगों को अपनी lockdown का experience साझा करेंगे

जब पहली बार lockdown हुआ तब मेरा बोर्ड एग्जाम चल रहा था। बस आखिरी पेपर बचा था english का | तब मोदी जी ने 21 दिन का lockdown लगा दिए ‍‌| पूरे देश में covid-19 के वजह से फिर exam स्थगित हो गया | ये पूरा 21 दिन इसी टेंशन में गुजरा की पेपर होगा की नही होगा | होगा तो कब होगा पूरे डेढ़ महीने इसी टेंशन में गुजर गया | फिर पता चला की पेपर cancle हो गया| उस टाइम कोरोना पुरे विश्व में बहुत तेज़ी से फ़ैल रहा था | cancle होने के बाद फिर नया टेंशन आ गया की अब रिजल्ट कब आएगा , कब सारे comptetive exam के फॉर्म आयेंगे कहा पढ़ना है etc| कुछ दिनों बाद बोर्ड रिजल्ट भी आ गया | रिजल्ट तो अच्छा आया जितना सोचा उससे भी अच्छा आया |

उसके बाद lockdown पे lockdown लगता गया घर पर रहते रहते  बोर हो गये थे टाइम भी नही बितता था ना ही कुछ अच्छा लग रहा था टीवी देखो तो हर न्यूज़ पर कोरोना ही कोरोना था | फिर रिजल्ट के एक दो हप्ते बाद एक फ्रेंड से बात कर रहे थे तो उससे ही एक आईडिया मिला जिससे टाइम भी पास हो सके और अच्छा भी लगे और इससे कोई कुछ सीख भी ले | ओ आईडिया दिया की बच्चों को पढाओ | तभी हम सोच लिए जबतक lockdown चलेगा गांव पर ही कुछ बच्चों को पढ़ाएंगे | आईडिया तो मिल गया फिर सोचना ये था की बच्चें कैसे आयेंगे फिर 2 -3 दिन बाद अपने घर के बाहर ground में वैसे ही बात कर रहे थे  2-3 बच्चे थे आस पास के हम उनलोगों से पूछें अगर हम पढ़ाएंगे तो पढोगे तुम लोग तो उनलोगों ने कहा ठीक है पढ़ेंगे लोग दीदी आप पढाओ | फिर फीस के बारे में पूछने लगे सब तो हमने कह दिया तुमलोग जितना दे पाओ उतना दे देना जबतक मेरा कही एडमिशन नही हो जाता तबतक पढ़ाएंगे तुमलोगों को | बोले सब ठीक है |

फिर दो तीन दिन बाद मेरा छोटा भाई और घर के बगल के 2-3 बच्चे पढ़ने आये सब 1-6 क्लास के थे । मैंने पहले ही दिन से पढ़ना शुरु कर दिया था। सब अच्छे से पढ़ते भी थे उनलोगों के साथ मेरा भाई भी पढ़ ले रहा था नही तो दिनभर इधर उधर खेलता ही रहता था | फिर धीरे धीरे और भी बच्चे बढ़ते गए गांव के अन्दर से भी बच्चे आने लगे अब पुरे 20 बच्चे हो गये थे। जो नर्सरी से लेकर 9वीं क्लास तक थे। मैं उनलोगों को सभी सब्जेक्ट पढ़ाती थी | अब बच्चे 20 से ऊपर हो गये थे मैनेज करने में दिक्क़त होने लगी थी इसीलिए दो sift (3 बजे दोपहर से शाम 6 बजे तक ) में पढ़ाने लगे। बच्चो को पढ़ाने में अपनी छोटी बहन का भी सहायता लिए वो और बच्चो को मैथ पढ़ाती थी जब हम दूसरे बच्चो को english या साइंस पढाते थे | येसे ही lockdown बढ़ता गया 15 अगस्त आ गया | मैंने और सभी बच्चो ने मिलकर 15 अगस्त को celibrate करने का प्लान किया | छोटे छोटे बच्चो ने बहुत सुन्दर और मनमोहक डांस करके और गाना गाकर indepence को सेलिब्रेट किया | उसके बाद सभी को मैंने अपने पॉकेट मनी से टॉफ़ी खरीदकर दिए | बच्चे बहुत खुश हुए और मै भी बहुत खुश हुयी |

ऐसा नही है की lockdown में बस पढाये ही starting से योग भी किये और कोचिंग के बच्चो को भी सिखाये ओ भी किये सब लेकिन ऐसा होता ही है छोटे बच्चे कुछ भी थोड़ा दिन करते है सिखते है और कुछ दिन बाद धीरे धीरे छोड़ दिए सब 😀😂😅 लेकिन उन सबने किया उसी को जानकर देखकर ख़ुशी मिली | इससे नही फर्क पड़ता है की ओ सब कितना दिन किये | सोचे छोटे है इतना कर दिए बड़े होंगे सब इसके बारे मे जानेंगे तो हो सकता है उन्हें मेरा सिखाया याद आये  | इसी के साथ खाना भी बनाते थे । घर में सुबह में मै और शाम को मेरी बहन मम्मी का  सहायता कर देती थी | ऐसे ही आधा से ज्यादा lockdown मेरा बीत गया |

फिर सितम्बर आया मैंने youtube से ब्लॉग्गिंग के बारे में सीखी और खुद का एक ब्लॉग(prauniyarownpassion.blogspot.com) बनायी | और तभी से ब्लॉग्गिंग करने लगी | ब्लॉग्गिंग करने से मुझे सोशल साईट और ब्लॉग्गिंग के बारे में बहुत सी जानकारी मिली| एक्चुअली मेरा इनसब चीजों में बहुत इंटरेस्ट रहता है इसीलिए हमेशा कुछ न कुछ इन्टरनेट के जरिये सिखती रहती हू | ऐसा नही है की बस इन्ही सब चीजों को करती थी youtube के जरिये ऑनलाइन अपना भी पढती थी | साथ में एडमिशन का टेंशन हमेसा बना रहता था और lockdown भी बढ़ता जा रहा था | इसी बीच हमारे कई सारे फेस्टिवल भी आये और उन्हें हम सब ख़ुशी – खुशी मनाये |

फिर आ गया छठ पूजा , छठ पूजा तक ही पढाये उसके बाद छुट्टी कर दिए सारे बच्चे और पढना चाह रहे थे लेकिन क्या करते मुझे भी तो अपना पढना था और एडमिशन का टेंशन तो था ही |

कोचिंग की एक बात मुझे इतनी अच्छी लगी और हसी भी आई एक दिन एक बच्ची इतनी मासूमियत से कह रही थी दीदी आप ही हमलोगों को पढाओ आप कही मत जाओ पढ़ने यही रहो |

फिर कुछ दिन बाद मेरा एडमिशन लखनऊ के एक कॉलेज में हो गया| एक टेंशन तो ख़त्म हुआ अब एक टेंशन और था कि  कॉलेज कब खुलेगा | फिर सारे टेंशन को खत्म करते हुए एक महीने बाद वो दिन आ गया और मेरा कॉलेज ओपन हो गया फिर एक महीने क्लास अटेंड करने क बाद फिर कोरोना का 2nd wave आ गया फिर lockdown हो गया और सभी हॉस्टल से घर चले आये और अब ऑनलाइन क्लासेज चल रही है(अप्रैल-मई )

ये थी मेरी lockdown की खट्टी मीठी कहानी






To be continue………...

#lockdown

#staysafe 

#staysafestayhome

#prauniyarownpassion.blogspot.com

#myguide

#myexperience

#novainstituteofnursingandparamedicalscience





Saturday, April 24, 2021

Experience during online class



So, Hello everyone

I am Pooja Rauniyar. I am a student of B.Sc nursing 1st year from ....

Nova institute of nursing and paramedical science Located in STP Rd, Behind Ganpati Vihar Colony, Khargapur, Gomti Nagar, Lucknow, Uttar Pradesh 226010 

 

How are you?I hope you all are well and safe.

Firstly I pray for all who is facing very difficult condition. I hope that God gives them the strength to bear this bad time.

Now, I am going to talk about my experience during online classes.


 I think  during this pandemic situation taking online class is better idea for every students and teachers. We are safe during online class. Our parents' feel good  they have no any tension about us.  


 Our classes running good.Teacher send us notes as wel as like in the class. Explain very fluently.  All students listen  teacher voice clear and clear their doubts. All teachers observed each and every students carefully.During online class video is also on.So that teacher can see every activity of students. Online class was very advantageous for us and our family.





Every thing/ plan have merits and Demerits. It has also many demerits..............



Many students have network issue. Mostly I have more issue with network due to indo-nepal boarder  their some particular place where network come . But it was not too good all time video and audio stop come a notification like connecting . It was very irritating moment for me.

Due to network problem students can' t here teachers voice  and teachers can't here students voice.

Many students wondering here and there.

Many students eat something .

Many students sleep during class.

Sometimes teacher voice not come so students murmuring with their friends.

The most important problem for every class representative ( C R ) , if any student message unnecessary so teachers scold CR , and give a name for class, your class students are oversmart , overconfident. 😁😂 

So everyone please save me from this I already become very iritate  due to network.

        ONLINE CLASS ATTENDENCE






So thank you everyone for reading my blog . If any suggestions then you can suggest me.

Be safe

Be negative ( covid 19 )

Otherwise always be positive 

#maskoncoronagone

#maintainsocialdistancing

Do gaj duri mask hai jaruri

(दो गज दूरी मास्क है जरुरी)




#novainstituteofnursingandparamedicalscience

#prauniyarownpassion

https://www.instagram.com/p/CN-l-cDl-Uj/?igshid=1wub8jk88th4





 

Monday, January 4, 2021

You are ashish/aarohi.write an article in about 120words on 'the role of rag pickers in saving the urban environment

                 


                          THE ROLE Of RAG PICKERS 

                                        In Saving The Urban Environment

                                             By:-Aarohi/Ashish



 The rag-pickers play very important role in saving our environment. They  clean our garbage which we spread here and there. They pick waste material like, plastic, threads and some mudy garbage,etc. They collect all these garbage in any sack . And they separate all garbage and throw waste material outside. They play very important role in our daily-life. They clean our society or colony by doing this type of  such a great jobs.

But in this job they face many problems also like,they suffer from many disease like Asthma, Malaria, Dengue,etc. They are very helpful to us. We should care and respect them.



Friday, September 4, 2020

My favorite TV programme

 My favorite TV programme

Television is the best source of entertainment for all. One can enjoy programme round the clock. I have a liking of most of serials as they have educative as well as moral values. Their are others who say television viewing is useless. It is an idiot-box. But I like and have watching serials on television. The Ramayana is my best television programme. It is telicasted by the Durdarshan on every day during lockdown. It tells us about our past culture, traditions and rituals. This popular among the indians and most of the worlds country. It is an eyeopener and provides religious, moral as well as ethical knowledge. The presentation of the story character and dialogues are interesting and instructive. It teaches us how to be well mannered. I never missed it. It was an amazing show. 
😍😍


#ramayana
#goddessita

Happy Gandhi+shastri jayanti

  Today is the best day of year because on this day the god has send us the two honourable people in our country . Those two people's ar...